एक वो वक्त था

एक वो वक्त था
देवकी जी अपने कमरे में बड़बड़ाती हुई घुसी “सब अपने मन की करते रहते हैं, मेरी तो कोई सुनता ही नहीं है।”

तब उनके पति मोहन जी ने पूछा, “क्या हो गया देवकी, किस पर बड़बड़ा रही हो?”
देवकी जी बोली, “वही तुम्हारी लाडली बहू, आज उसका मन हो गया कि एयर कंडीशन खरीदना है, तो शाम तक देखना खरीद कर ही मानेगी, मैंने उससे कहा कि पंखे, कूलर में ठंडी हवा तो आती है, मगर कोई मेरी सुनता ही नहीं। रोहित उसका गुलाम हो गया है, तुम देखना दिला ही देगा।”

तब देवकी जी के पति मोहन जी समझ गए कि रिश्तों की आपसी खींचतान का असर केवल सास बहू पर ही नहीं बल्कि पूरे घर होगा , उन्होंने अपनी पत्नी देवकी जी से कहा, “बैठो मेरे पास, तुमसे कुछ बात करनी है।”
देवकी जी पलंग पर मोहन जी के समीप बैठ गई, तब मोहन जी ने कहना शुरू किया, “तुम्हें याद है एक वो वक्त था जब गर्मियों के दिनों में हमारी नई-नई शादी हुई थी हम दिन का समय कैसे गुजारा करते थे?”

तब देवकी जी बोलीं कि “याद क्यों नहीं, मुझे अच्छे से याद है, उस जमाने में कूलर वगैरा तो आते नहीं थे, तब तुम खस की पट्टियां बाजार से लेकर आते थे और उन्हें गीला कर के पंखे के सामने बाँध देते थे, ताकि मुझे गर्मी ना लगे, तुम कितना ख्याल रखते थे मेरा उस समय, जबकि माँ जी पीछे से चिल्लाती ही रहती थीं।” ऐसा कहते कहते अचानक देवकी जी की नजर अपने पति पर टिकी और वह सब समझ गई कि उनके पति क्या कहना चाहते हैं?

तब मोहन जी प्यार से अपनी पत्नी का हाथ अपने हाथों में लेकर बोले, “देखो देवकी, वह सिर्फ तुम्हारी बहू ही नहीं, रोहित की पत्नी भी है, जो अपेक्षाएं तुम्हारी मुझसे थी, वही अपेक्षाएं बहू की रोहित से भी होंगी, और यही जमाने का दस्तूर भी है, अगर पत्नी अपने पति से नहीं तो और किस से अपेक्षा रखेगी कि कोई उसके दुख दर्द को समझे और उस की सुविधाओं का ध्यान रखें, हमारे जमाने में तो कूलर भी नहीं थे तो एयर कंडीशनर की कहां से सोचते, आज जब चीजें उपलब्ध है और हमारा सामर्थ्य हैं तो क्यों न सुविधाओं का लाभ उठाएं?

मोहन जी ने कहा, “देवकी, हमारे बच्चे बहुत अच्छे हैं, वे हम दोनों के बारे में अच्छा ही सोचते हैं, फिर क्यो हम गलत धारणा बना कर आपसी विश्वास को कमजोर करें। और मैं अपने बेटे और बहू दोनों को अच्छी तरह जानता हूं, तुम देखना पहला एयर कंडीशनर वह हमारे कमरे में लगाएंगे, तब उनके खुद के कमरे के बारे में सोचेंगे। यह सत्ता परिवर्तन है देवकी, तुम बहू और बेटे के हाथ में जिम्मेदारी सौंप दो और चैन से रहो।”

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