जीवन में रिश्तों की अहमियत|(Importance of Relations in life in Hindi.)

चलिए एक ऐसी गाड़ी की कल्पना कीजिए, जिसे आप रखना पसंद करेंगे, चलाना पसंद करेंगे| जाहिर है उसका होना आपको खुशी देगा| लेकिन अगर आप उसे अच्छे से इस्तेमाल करना चाहते हैं, और आप चाहते हैं कि आप उसे चलाने का पूरा आनंद ले, तो आपको उसका ख्याल भी रखना होगा| उसे साफ सुथरा रखना होगा| सर्विस करानी होगी| जरूरत पड़े तो इंश्योरेंस भी कराना होगा| Importance of Relations in Life in Hindi

इसके बदले में वह गाड़ी आपको वह खुशी देगी जो खुशी आप उस गाड़ी से चाहते हैं| वह आपको एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में मदद करेगी|उसके होने की वजह से आप संतुष्टि महसूस करेंगे, क्योंकि आप हमेशा से ही एक ऐसी गाड़ी रखना चाहते थे| और कभी-कभार यह दोस्तों के बीच थोड़ा दिखावा करने के भी काम आएगी|खैर… यह एक तरह का रिश्ता होगा जो आपने अपनी गाड़ी के साथ बनाया होगा|

Let’s Have A Deeper Look

अगर इस रिश्ते के बारे में हम और ज्यादा गहराई से सोचेंगे तो पाएंगे कि जैसे-जैसे वक्त बीत रहा है उसके प्रति आपके व्यवहार में भी बदलाव आ रहा है| आपका उसके प्रति लगाव कम होता जा रहा है, और यह भी है कि आपके लगातार ध्यान रखने के बावजूद भी उसका प्रदर्शन पहले जैसा नहीं रहा है| आप उससे भावनात्मक रूप से जुड़े थे (अगर आप कुछ वक्त की खुशी को भाग भावना मानते हैं तो) लेकिन आपका यह जुड़ाव आपकी गाड़ी के प्रति लगातार कम होता जा रहा है|

खैर रिश्तो को समझने के लिए दिया गया यह उदाहरण सही नहीं, लेकिन इस उदाहरण का प्रयोग शुरु में ही करना बेहद जरूरी था, वह इसलिए क्योंकि जैसे-जैसे वक्त बदल रहा है लोगों के लिए रिश्तो के मायने भी बदलते जा रहे हैं और आजकल “लोगों से चीजों के रिश्ते” और “लोगों से लोगों के रिश्ते” दोनों में ही कोई ज्यादा बड़ा फर्क नहीं रहा है| हर रिश्ते की अहमियत उतनी ही है जितना उसे इस्तेमाल किया जा सकता है|

जीवन में संतुलन बनाए रखने के लिए जीवन के तीन पहलुओं पर ध्यान देना बेहद जरूरी है, और यदि इन तीनों पहलुओं को समान रूप से अहमियत दी जाए तो जीवन कई हद तक सरल हो जाता है| इन्हें संतुलित जीवन के स्तंभ भी कहा जा सकता है जो इस प्रकार है:

अगर आप भी रिश्तो को ऊपर दिए गए उदाहरण की तरह निभाते हैं, तो आप आपकी जिंदगी में संतुलन बनाए रखने के लिए तीन सबसे अहम स्तंभों में से एक को विकृत कर रहे हैं, इसलिए वक्त रहते आपका इस विषय में सोचना बेहद जरूरी है|

या फिर अगर आप ऐसे लोगों में से हैं जो इस तरह के रिश्तो का शिकार होते हैं तो आपको बहुत जल्द सावधान होने की जरूरत है|

रिश्ते खराब होने की कुछ बड़ी वजह

ऊपर दिया गया उदाहरण और उसके द्वारा समझाइए गई वजह रिश्तो के खराब होने की कई बड़ी वजहों में से एक वजह है|कुछ और बड़ी वजह हैं जिनकी वजह से आपके रिश्तो में खटास आ सकती है और यह आपके जीवन का सुख और सुकून बर्बाद कर देगा| तो रिश्तो की अहमियत को समझने से पहले क्यों ना यह समझ लिया जाए कि रिश्तो के टूटने के बड़े कारण क्या हैं , जो निम्न प्रकार हो सकते हैं :

  1. रिश्तो से भावनात्मक जुड़ाव ना होना |
  2. गलतफहमियां उत्पन्न होना|
  3. एक दूसरे को धोखा देना|
  4. विश्वास की कमी|
  5. रिश्तो में रिश्तो के हिसाब से व्यवहार ना करना|
  6. एक दूसरे के लिए सम्मान की कमी|
  7. वक्त जरूरत पर एक दूसरे का साथ ना देना|
  8. रिश्तो में घुटन महसूस करना/कराना|

रिश्तो का असल मतलब

भावनाओं के बिना इंसान सिर्फ एक शरीर है||

ओशो

आप एक भावहीन व्यक्ति की तुलना किसी गाड़ी, पत्थर, कुर्सी या फिर किसी भी बेजान चीज से कर सकते हैं| या फिर दूसरे नजरिए से देखें तो अगर आप लोगों को उनकी जरूरत के हिसाब से ही याद करते हैं, तो आप एक शरीर से ज्यादा कुछ नहीं है, जिसकी तुलना गाड़ी, कुर्सी, पत्थर या फिर किसी भी बेजान चीज से की जा सकती है| रिश्तो को समझने के लिए इंसान में संवेदनाओं का होना बेहद जरूरी है, भले ही वह हर वक्त संवेदनशील महसूस ना भी करें|

बात करते हैं कि कैसे हमारी भावनाएं रिश्तो से जुड़ी हैं|

जाहिर है सीधे तौर पर|

आप बेजान चीज से भी रिश्ता बना सकते हैं उसे भावनात्मक रूप भी दे सकते हैं लेकिन रिश्ते एकतरफा भावनाओं पर नहीं चलते, आपको आगे बढ़ना ही होता है|(आप इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि यदि आपके लिए किसी की भावनाएं खत्म हो गई हैं तो उस रिश्ते में बने रहना अपने आप को दुख देने भर से ज्यादा कुछ नहीं है|)

अतः रिश्तो के बारे में हम बोल सकते हैं कि किसी व्यक्ति या जानवर से आपका भावनात्मक जुड़ाव और जिसकी वजह से वह व्यक्ति या जानवर भी आपसे परिस्थितियों के अनुरूप भावनात्मक जुड़ाव महसूस करता है, रिश्ता कहलाता है|

हम किसी एक तरह के रिश्ते के बारे में बात नहीं कर रहे हैं| रिश्तो में भावनाएं एक बड़ी भूमिका निभाती है, एक से दूसरे का भावनात्मक जुड़ाव बेहद जरूरी है, भले रिश्ता एक कपल का हो या फिर मां बाप से बच्चों का हो|

रिश्तों की अहमियत

हम पहले ही बता चुके हैं कि हमारे जीवन में रिश्तो की क्या अहमियत है, हम बता चुके हैं कि जीवन के मकसद को पाने में रिश्ते और समाज अहम भूमिका निभाने वाले तीन स्तंभों में से एक हैं| खैर अब इसे समझने का वक्त है|

सामाजिक महत्व

चलिए एक ऐसे समाज की कल्पना कीजिए, जहां रिश्तो-भावनाओं के लिए कोई जगह नहीं है| जाहिर है ऐसे समाज में रहना संभव नहीं|
इंसान एक सामाजिक प्राणी है, और साथ ही एक भावनात्मक प्राणी भी| रिश्ते और समाज उसके जीवन का अभिन्न अंग है, क्योंकि चाहे मानव का व्यक्तिगत विकास हो या पूरी मानव सभ्यता का, समाज, रिश्तो और भावनाओं ने हमेशा उसे आगे बढ़ने में बेहद मदद की है| अच्छे रिश्तो से एक सक्षम समाज बनता है, और कई सक्षम समाजों से विकास की ओर अग्रसर सभ्यता|

व्यक्तिगत महत्व

हर इंसान की जिंदगी का मकसद होता है खुशी से जीना| खुश रहने के लिए इंसान सक्षम और निश्चिंत होने चाहिए| इन दोनों ही मकसद में रिश्ते अहम भूमिका निभाते हैं| रिश्ते और समाज इंसान को सक्षम बनाते हैं, और उनका होना आपकी परेशानियां कम करता है, अगर नहीं भी करें तो एक भावनात्मक सहारा तो देता ही है|

उम्मीद है आपको हमारा यह ब्लॉग पसंद आया होगा| इस बारे में अपनी राय या फिर कोई भी सवाल आप हमें नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर पूछ सकते हैं|

धन्यवाद

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